प्री-मानसून बारिश का कहर: 25.75 हेक्टेअर फसलें तबाह, 96 मकानों को नुकसान
प्री-मानसून बारिश का कहर: 25.75 हेक्टेअर फसलें तबाह, 96 मकानों को नुकसान
अमरावती जिले में तेज बारिश और हवाओं से किसानों व ग्रामीणों पर दोहरी मार
अमरावती: जिले में मानसून पूर्व हुई बारिश ने जहां भीषण गर्मी से राहत दी, वहीं किसानों और ग्रामीणों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। सोमवार से गुरुवार के बीच जिले में दर्ज 8.6 मिमी प्री-मानसून बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी फसलें प्रभावित हुईं तथा कई मकानों को नुकसान पहुंचा है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार जिले में 25.75 हेक्टेअर क्षेत्र की फसलें और 96 मकान प्रभावित हुए हैं।
भातकुली तहसील के 16 गांवों में पपीता, नींबू, केला, आम, तरबूज, सीताफल, तिल, मूंग और विभिन्न सब्जी फसलों को नुकसान पहुंचा है। कई खेतों में तेज हवा से फसलें जमीन पर गिर गईं, जबकि कुछ क्षेत्रों में जलभराव के कारण उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार होने के दौर में हुए इस नुकसान से आर्थिक संकट गहरा सकता है।
इसके अलावा अमरावती, दर्यापुर, नांदगांव खंडेश्वर और अचलपुर तहसीलों के 12 गांवों में भी बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। इन क्षेत्रों में 92 मकानों और 11 तबेलों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर मकानों की छतें उड़ गईं, दीवारों में दरारें आईं और घरेलू सामान भी प्रभावित हुआ।
ग्रामीणों ने बताया कि अचानक बदले मौसम ने उनकी तैयारियों को झटका दिया है। किसानों को जहां फसल नुकसान की चिंता है, वहीं मकान क्षतिग्रस्त होने से कई परिवारों के सामने रहने की समस्या भी खड़ी हो गई है।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्री-मानसून बारिश से खेतों में नमी बढ़ी है, जो आगामी खरीफ सीजन के लिए लाभदायक हो सकती है, लेकिन जिन क्षेत्रों में पानी जमा हुआ है वहां फसलों को गंभीर नुकसान होने की संभावना है। विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाएगा।
प्रशासन की ओर से नुकसान का पंचनामा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की संभावना है। प्रभावित किसानों और ग्रामीणों को राहत देने के लिए शासन स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी मौसम में बदलाव और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना व्यक्त की है। ऐसे में किसानों को खेतों में जलनिकासी की व्यवस्था रखने और मौसम संबंधी सूचनाओं पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
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